लेखनी कहानी -29-Mar-2023
मन अम्बर पे मचा बबंडर
किसकी स्मृति अकुलाई है
बोझिल मन को बोझिल करती
ये किसकी परछाई है।
किसकी स्मृति का गुणगाण
मन करता है तान कमान
छवी किसकी है मानस पटल पे
मन को नहीं है तनिक भी भान।
मगर दर्शन की बाकी पिपासा है
डससे मिलन की अभिलाषा है
उसी से प्रकाशित जीवन की सभा है
उसी से पुर्ण जीवन प्रत्याशा है।
है कपोल कल्पित आदर्श वो
मन को है भान कि निष्कर्ष वो
जीवन की गतिशिलता में वृद्धि
जीवन का है उत्कर्ष वो।
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Shashank मणि Yadava 'सनम'
30-Mar-2023 08:22 AM
लाजवाब
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Reena yadav
30-Mar-2023 06:20 AM
👍👍
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Aliya khan
29-Mar-2023 10:04 PM
आप कविता में पोस्ट करे कहानी में कर दिया है
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